Friday, July 7, 2017

"living in an illusion is also a kind of an illusion." rin

              
एक पुरानी कविता की लाईनें ऐसे याद आ रही हैं जैसे छोड़ कर जाते हुए घर को उसके बागीचे में लगे पेड़-पौधे आख़री बार एक बार  फिर से देखने का मन करता है! खाली कमरों और उनके खिड़की-दरवाज़ों, यहाँ तक बिखरे कागज़ के टुकड़ों तक को उठा कर पढ़तें हैं, जाने किस ख्याल में!!
               

                              ....उम्र के साथ 
रंग ढलती तुम्हारी 
आँखों की पुतलियों मे....
मैने देखा है 
अपना चेहरा मुस्कराता हुआ,

तुम्हारे चेहरे की लकीरों मे
मैने देखा है गुजरते 
समय को, और 
तुम्हारी परछाई में 
देखी है अपनी परछाई,....



                 
             

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