Monday, July 3, 2017

कहानियाँ बनती हैं



अठाहरवीं मंजिल 
  

'तुम अँधेरे में क्यों चलती हो?'
अचानक अँधेरे में किसी को आता देख उसने पूछा!
'मुझे पसंद है, और मुझे ठंडक मिलती है!' वह बोली!
'पर अँधेरे में तुम्हारी पाजेब की आवाज़ मुझे क्रीपी फीलिंग देती है!'
वह उसकी पाजेब की आवाज़ याद करता हुआ बोला!
'पर मुझे ये आवाज अच्छी लगती है!' वह वैसे ही बोली!
'पर तुम नंगे पाँव क्यों चल रही हो?' उसे स्लीपर की कोई आवाज 
नही सुनायी दी तो उसने पूछ! उसे लग रहा था वह कमरे में यहाँ से वहाँ 
घूम रही है, पर क्यों? उसे परेशानी हो रही थी!
'मुझे अच्छा लगता है, ज़मीन की ठंडक मुझे अच्छी लगती है!' वह फिर 
उसी तरह बोली!
'तुम्हारे घर में कोई तुम्हारे जैसा नही है!' वह बोला!
'क्योकि यहाँ मेरे सिवाय कोई पाजेब नही पहनता!' वह फिर वैसे ही बोली!
'कोई भी नही?!!' अब वह हैरान था, इतने बड़े घर में कोई नही पहनता!
'हाँ, कोई भी नही, क्योकि यहाँ सिर्फ मै ही रहती हूँ और कोई नही!' 
वह अजीब तरह से बोली तो वह डर गया और चौक कर बोला-
'लाइट ऑन करो!' वो घबरा गया था! वो तो अपने दोस्त के घर आया था और उसके घर में तो ढेर सारे लोग रहते हैं, एकदम जम्बो जेट जितनी बड़ी फॅमिली! 
'लाइट काम नही कर रही है!' वह फिर उसी टोन में बोली!
'पर बाहर तो कॉरिडोर में लाइट है!' वह कहते-कहते खड़ा हो गया!
'ऐसा है तो जाओ चेक कर लो!' वह थोडा करीब आ कर बोली, पर अँधेरे की वजह से वो उसका चेहरा देख नही पाया! वह तेजी से उठ कर बाहर आ गया!
बाहर लाइट थी! अचानक उसकी नज़र लिफ्ट के डिस्प्ले पर पड़ी और वह 
हैरानी से देखने लगा! और सोच में पड गया!
'18वीं मंजील! मुझे तो बारहवें फ्लोर पर जाना था और मैंने बटन भी बारहवे नम्बर का दबाया था, तो...क्या मै बाहरवे पर हूँ और ये लिफ्ट 18वें फ्लोर पर है... क्या है ये... जहाँ तक मुझे पता है तो इस अपार्टमेंट्स में 18वीं मंजील नही हैं तो.... तो....??' वह चौंका और उसने कुछ कहने के लिए पीछे पलट कर देखा तो बुरी तरह वो डर गया! और वह तेजी से सीढियों से नीचे की तरफ दौड़ने लगा! वह दौड़ते-दौड़ते सोच रहा था की.....
'ये कैसे हो सकता है... ये कैसे हो सकता है.... पूरा का पूरा फ्लोर ही नही है... कोई फ्लैट नही था वहां... मै कहाँ आ गया हूँ.... वो कौन थी....!'
वह सोचता हुआ नीचे की तरफ दौड़ा जा रहा था! जाने कितनी सीढियाँ वो एक साथ कूद जाता था वो बीच-बीच में! दौड़ते-दौड़ते उसे महसूस हो रहा था की कोई और भी उसकी पीछे दौड़ रहा है! उसे अब साफ-साफ पाजेब की आवाज सुनायी दे रही थी! वह बुरी तरह डर गया था! वो पागलों की तरह नीचे तरफ दौड़ने लगा और उसके पीछे कोई ओर भी उसी रफ्तार से 
दौड़ रहा था! ग्राउंड फ्लोर आते ही वह बाहर की तरफ भागा! पर बाहर पहुच वह और हैरान हो गया!
'मै कहाँ हूँ? ये कौन सी जगह है? ये कैसी सी जगह है?' वह अपने आप से बोल रहा था! 
तभी उसे पीछे वही पाजेब की आवाज सुनायी दी और उसने पीछे पलट कर देखा और वह बुरी तरह डर गया और चीख पड़ा -
'तुम कौन हो और मेरे पीछे क्यों पड़ी हो?'
'मै तुम्हे चाय देना भूल गयी थी... तुम मेरे घर पहली बार आये... बिना चाय पीये कैसे जा सकते हो...मै तुम्हारे लिए चाय लायी हूँ.... लो पीयो!' 
उसने अपना हाथ बढ़ाया! वो सिर्फ़ उसका बढ़ा हुआ हाथ देख पाया और डर कर बोला-
'नही, मुझे कोई चाय नही चाहिए, मुझे जाने दो!'
अचानक अन्धेरें में दो हाथों ने उसे पकड़ लिया और उनकी जकड़ कसने लगी! वो डर कर चीखा-
'मुझे छोड़ दो... प्लीज़ मुझे मत मारो!'
वो बुरी तरह हिलने लगा और किसी की आवाज़ से उसे साफ़-साफ दिखने लगा! 
'कितनी बार तुमसे कहा है की लेट नाईट डरावनी फ़िल्में मत देखा करो.... किसी दिन मै तुम्हारा ये डब्बा छुपा दूंगी...देख लेना, हाँ नही तो!!' 
'ओह! सपना, तुम, थैंकस सपना, अच्छा हुआ तुमने मुझे जगा दिया!' एकलव्य बोला और गहरी सांसे लेने लगा!
'अच्छा-अच्छा ठीक है, अब तुम जल्दी से तैयार हो जाओ... लेट हो रहे हो फिर से तुम आज भी!'
सपना कमरे से बाहर जाती हुई बोली! सपना की पाजेब की आवाज़ सुन एकलव्य को अपना सपना याद आ गया और वह कूद कर पलंग से नीचे आ गया और रेडिओ ऑन कर नहाने चला गया! गाने के बोल सुन उसने थोडा सा दरवाज़ा खोला और बंद कर दिया और गाने के साथ-साथ गाता वह नहाने लगा-
डर लगे तो गाना गा.... डर लगे तो गाना गा....

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