Friday, May 29, 2015

एक दिन सब बीत जाता है.... जिस तरह प्यार बीत गया... एक दिन नफरत भी बीत जायेगी....



चलो गिनों आज तुम 


जाने से पहले 
उन सभी यात्राओं पर 
जहाँ चलना पड़ेगा 
फिर अकेले..... क्या 
लौटते है पहले हम 
या देखते भी नही 
बस चल पड़ते है...... 

हवा तेज है.....
कुछ सुनती नही..... 
उसने कभी सुना भी नही..... 
न जाने क्या 
कहती... बह रही है.... 
हम सुन पाते 
उसकी बात..... समझ पाते 
उसकी हर आहट का 
मतलब.... शायद हम 
ज्यादा महसूस कर पाते 
हर ख़ामोशी का मतलब..... 

चलो गिनों आज तुम 
आँखें बंद कर 
सारी गिनती...... याद है 
तुम्हे जितनी..... देख 
हैरान हो.... सुन कर हो 
परेशान मेरी बात.... 

अच्छा तो गिनों 
अपने सारे वो झूठ 
जो बोले है तुमने 
अपने आप से..... 
स्टोर में कही 
ढेर सामान के पीछे 
नोस्टाल्जिया से भरा 
कोई सामान नही हूँ.... 
जब कुछ ढूढ़ने गये 
तो याद आया....... 
आह! ये तो वो है..... 
फिर बंद कर रख दिया 
वह डब्बा वापिस..... 
न जाने कितनी 
सदियों के लिए...... 

चलो बात वही 
ले चलते है 
जहाँ से हुई थी शुरू.... 
यात्राओं पर जाते हुए 
हम लेते है विदा...... 
अगर हो कोई.... आये पीछे 
हाथ थाम... ले आख़री 
महक..... देखता हो 
आँखों में..... बिन कहे 
कहता हो.... फिर मिलेंगे....... 

चलो, अच्छा तो गिनों 
तुम अपने वो आंसू 
जो गुस्से..... और गुस्से 
ढेर सारे गुस्से में 
बहाये है तुमने..... 
                          ओह!!! तुम बड़े हो गये...  
भूल गये सारी गिनती..... 
तुम क्या सोच रहे हो..... 
हमेशा की तरह....... 
सोचते क्या हो.... 
देखते कहाँ हो.... 
बातें कहीं और..... 

अच्छा तो लिख रखना 
सारी गिनतियाँ..... सारे झूठ... 
सारे आंसू...... और जो भी 
आये याद तुम्हे.... जब भी.... 
एक दिन..... जब यूहीं...... 
कहीं भी..... कभी भी.... 
मिले तो दे देना 
हिसाब सारा...... नही तो 
बहा देना उसे नाव 
बना..... किसी बर्फीली 
घाटी की तेज़ बहती  
ठंडी हवा की नदी में.....!!! 

15.5.2015/ 10:05 रात बीत जाती है 
दिन के बिना.... एक दिन सब बीत जाता है,
जिस तरह प्यार बीत गया.... 
एक दिन नफरत भी बीत जायेगी.... 





Saturday, May 2, 2015

कोई तो नाम याद आये किसी चेहरे का

                 

अजनबी चेहरे 


याद रह गये 
अजनबी चेहरे..... 
हर चेहरे की कहानी 
कोई नयी नही.... 
पुरानी भी नही.... 
बस सुनी जा सके 
ऐसा भी नही था 
पर कई चेहरे थे 
नाम याद न रहा उनका..... 
चेहरे ..... बस याद 
रह गये वो चेहरे, 

कभी मिल जाये 
भी तो क्या होगा.... 
एक बार पलट कर 
देखा तो ख्याल आया 
शायद देखा था कहीं...... 
पर कहाँ.... याद नही..... 
वो पल..... वो पहर.... 
वो सड़क..... कुछ भी तो 
याद नही..... हर मोड़ पर 
मुड़ गये वो चेहरे..... 
वो खूबसूरत चेहरे..... 
हसीन मुस्कराते चेहरे..... 

भीड़ में गुम हो गये 
आँखें झपकाते चेहरे..... 
खूबसूरत आँखों से 
हैरान देखते मुझे... 
आईने के इस पार 
और उस पार के चेहरे, 
उंगलियों से छू कर 
तेरे चेहरे को..... 
बंद आँखों में डूबते 
उतरते वो चेहरे.... 

नाम देते उन्हें या 
पूछते उनका नाम..... 
ख्वाबों - ख्यालों में 
गुम होते चेहरे...... 
कहीं दूर..... बहुत दूर 
पीछे छूट गये 
वो अजनबी चेहरे!!! 

2.5.2015/ 5:30 इस शाम का 
सफर अब चल पड़ा..... अब तो 
मुस्कराओ.... के हम दूर जा रहे है तुझसे....