Tuesday, September 16, 2014

समय बदल रहा है हर पल... चौकाती है घडीयाँ

                                               एक घड़ी की बात
 


डोंग....डोंग...........डोंग .......................डोंग .........

पुराने घड़ियाल की आवाज थी! आवाज बहुत साफ और नाटकिय थी !

'देखा कहा था न...!' ये नैना की आवाज थी! मिस्टर थापा बड़े गौर से घड़ी की तरफ देख रहे थे ! उन्होंने दोनो हाथ अपनी कमर पर रखे और झुक कर देखा ! नैना पीछे खडी थी, वह अपने दोनो हाथ ऐसे बांधे खडी थी मानो उसे ठंड लग रही हो और बीच - बीच मे वह उन्हें और सिकोड़ लेती थी ! वे दोनो बहुत देर से घड़ी को देख रहे थे ! नैना का कहना था कि घड़ी मे आवाज है पर घड़ी की सुईयाँ नही चलती !

'भई, ये घड़ी मेरे दादाजी के टाईम की है...., उनके एक अंग्रेज अफसर ने उन्हें गीफ्ट की थी !' मिस्टर थापा बगल की दिवार पर लगी अपने दादाजी की तस्वीर ओर देखते हुए बोले !

उस एंटीक घड़ी के ठीक ऊपर एक मार्डन घड़ी लगी हुई थी ! जिसका टाईम हमेशा सही और साफ होता था ! यानी के दूर से दिखाई देता था, इसलिए मिस्टर थापा ने कभी ध्यान ही नही दिया कि घड़ी चलती नही है, सिर्फ उसका घड़ियाल बजता है.....और उन्होंने कभी कोशिश भी नही की!  क्योकि उनका ध्यान उस तरफ जाता भी नही था ! वो कभी उस घड़ी को चाबी भी नही देते थे ! कभी - कभी जब उनका बेटा आता तो वह ही चाबी देता था या फिर कभी - कभी उनका नौकर ....! पर पिछले दो सालो से उसने भी चाबी नही दी तो घड़ी बंद खडी थी !