Sunday, June 1, 2014

एलेक्स और लाल टमाटर



बादलों का घर 


दूर.... बादलों का घर -
हो अगर ...
आसमां पर -
भालूओं का घर -
हो अगर,
हम चले - तुम चलो 
ओ - मेरे लाल टमाटर, 

हो - जहाँ, खेतों में शहर,
उगती हो सब्जियाँ
खिडकियों पे जहाँ -
और छतों पर बसा 
इक फलों का नगर -
फूलों के बाग हो
सडको पर अगर, और 
बहती हो शरर - बत की 
एक छोटी नदी -
जिसमे हम - तुम चले 
सैर को अगर....लेके 
साथ अपने वो फूलों 
वाले बड़े मग,
खूब शरर-बत पीये -
और खेले हम अगर...
हो ऐसा जो अगर-

दूर बादलों का घर -
हो अगर .....

ओ मेरे लाल टमाटर 
हो तुम्हारे पंख जहाँ 
इतने रंगों वाले,कि 
इंद्रधनुष भी लगा ले 
अपने घर मे ताले,
शरमाये हर बार 
जब तुम पर नजर डाले -
खिडकियों से झांके वो
डर के पर्दे डाले,
तुम चलो अकड के, और 
मै चलू घूमता जहाँ -
रात - दिन हो जहाँ, और 
दिन चाँद वाले -
सूरज खेले तारों संग 
हो जहाँ मैदान बरर-फ वाले,
दिन छुट्टियों के हो,
रात तारों की सैर वाले,
हम चले - तुम चलो
सैर को अगर, लेके 
रथ जुगनूओ वाले -
बस ऐसे ही रात जाये और 
दिन खाते बरर-फ के 
खट्टे - मिठ्ठे शरबती गोलो वाले,

दूर बादलों का घर -
हो अगर 
आसमां पर -
भालूओं का घर -
हो अगर,
हम चले - तुम चलो 
ओ मेरे लाल टमाटर......!!!


                    यह कविता गीत 'एलेक्स और लाल टमाटर' कहानी मे से है,
                  लाल टमाटर उसके रंग - बिरंगे सुंदर प्यारे मुर्गे का नाम है,
                   एलेक्स की कल्पनाओं की दुनियाँ हाथी से बड़ी और इंद्रधनुष 
                  से भी ज्यादा रंगों वाली है .......