Monday, October 24, 2011

बादलों के पंख

बादलों के पंख

हुन - हुपहुप, हुन - हुपहुप 
करता था कीड़ा
काले थे बादल
पानी था गीला

आसमां के संग

बादलों के रंग,
फैले थे
इस तरह से
जैसे -
मोर के हो पंख,

छम - छम - छम -छम

बरसा था पानी,
बहती हवा मे
गीला था पानी,

तितलियों के रंग

आसमां के संग,
बादलों के पंख कई
उड़ -- चले है संग,

जंगल के ऊपर

खेतों पर नीचे,
सागर के आगे
नदियाँ के पीछे,

बारीश के कई रंग

बादलों के संग,
गाते सारस
ऐसे उड़े
जैसे लहराती हुई पतंग,

हुन - हुपहुप, हुन - हुपहुप 

करता था कीड़ा,
काले थे बादल
      पानी था गीला ......