Tuesday, August 9, 2011

बादल और मेंढ़क

                            बादल और मेंढ़क
                      
                         
                        छोटा सा इक मेंढ़क
                        छोटे-छोटे हाथ,
                        कूद रहा घाटी के अंदर
                        जैसे हुई कोई बात,
                      
                     
                        भागा-भागा आया बादल
                        देखो छतरी लेके,
                        झाँक रहा था खिड़की से
                        न कोई पानी फैंके,
                      
                      
                        चीयू - ची - चूऊ - चूऊ
                        वायलन था बजाया,
                        उछल - कूद कर टिड्डे ने
                        कैसा नाच दिखाया,
                      
                      
                        भीग रहा था मेंढ़क
                        देखो चश्मा था लगाया,
                        कूद गया घाटी में
                        जब साफ नजर न आया,
                      
                      
                        फिर कूद - कूद कर घाटी में
                        कैसा शोर मचाया,
                        बादल आया छतरी लेके
                        वो बोला बादल छाया,
                      
                      
                        फिर छुप गया पत्तों के नीचे
                        मेंढ़क था घबराया,
                        जब छम - छम पानी बरसा
                        वह बाहर निकल कर आया,
                      
                      
                        बादल नाचे छतरी लेके
                        मेंढ़क गाना गाये-
                        टर्म - टर्म - टर्म
                        कैसा शोर मचाये,
                      
                      
                        छोटा सा इक मेंढ़क
                        छोटे - छोटे हाथ,
                        खुश होकर बादल से बोला
                        क्या खूब की बरसात....
                      
                        टर्म - टर्म - टर्म .....!!!
                      
                      
                      
                  
               

Monday, August 8, 2011

हमारा रावण

                                          हमारा रावण
 

‘रघू, ए रघू....गौरी नही आया आज?’बृन्दा बोला और उन्नी की तरफ देखने लगा!
'हाजरी कैसे होगी?’देबू बोला!
' प्रौक्सी दे देते हैं!’रघू ने आँखे बन्द किये ही जवाब दिया!
सभी हँस पडे, पर उन्नी चूपचाप बैठा आसमान की तरफ देख रहा था!
उन्नी अभी भी चूप था!
'ए उन्नी.....क्या है, तू चूप क्यो है...बोल न?' रघू ने उन्नी को इस तरह चूप देख कर पूछा!
उन्नी अभी भी चूप था! सभी हैरान थे पर वह दूर घाटी की तरफ देख रहा था!

Thursday, August 4, 2011

कौआ बटैलियन

                                                                   कौआ बटैलियन

                                        
                                        
सारी रात बारीश होती रही और सूबह-सूबह छोटी-छोटी मुलायम रूई की तरह बर्फ गिरने लगी!      

पर गुलमुल और झुलमुल छुछुन्दर भाई गिरती बर्फ मे खेल रहे थे! खेल भी बडा मजे का था! गुलमुल, झुलमुल को धक्का देता तो वह बर्फ पर गोलमोल होता हुआ जब किसी झाडी से टकराता तो छम से सारी बर्फ झुलमुल पर गिरती!

धक्का देने की शर्त थी कि धक्का देने वाला आँखे बन्द करके धक्का देगा और लुढकने वाले पर जब बर्फ गिर जाती तो वह पुकारता.....आ..जा..! तो फिर ऐसा ही हुआ, झुलमुल ने पुकारा.....आ...जा...! अरे रूको-रूको.....खेल का आगे का हिस्सा तो हमने बताया ही नही....हाँ तो भाई जैसे ही लुढकने वाला बर्फ से ढकता तो धक्का देने वाले को बर्फ से ढके हुए की पूँछ बतानी होती है कि पूँछ किस तरफ है!

छोटी प्यारी आन्या

छोटी प्यारी आन्या
                         
लिटल रेड राईडिग हूड की कहानी पुरानी हो गई है, सभी जानते है!
पर छोटी प्यारी आन्या की कहानी किसी को नही मालुम!
वो एक ही दिन में मेरी अच्छी दोस्त बन गई थी!

छोटी प्यारी आन्या तराई के एक शहर में अपने माँ-पिताजी के साथ रहती है और उसकी नानी उस शहर से लगे जंगल में रहती है! अब कौन शहर से हफ्ते में दो बार जंगल में जाकर जड़ी बूटियां इकठ्ठा करे, इसलिए नानी ने घर ही वहाँ बनवा लिया! लोग अक्सर जड़ी बूटियां लेने दूर-दूर से नानी के पास आते थे! आन्या भी अक्सर नानी से मिलने जाती थी!

शहर से थोडी दूर एक गाँव में नानी की एक सहेली रहती थी और वह भी जड़ी बूटियों से लोगो का ईलाज करती थी! नानी जब भी महीने में एक बार अपनी सहेली से मिलने जाती तो पूरे दिन आन्या नानी के पालतू जानवरों की देखभाल करती थी!

ऐसे ही एक दिन नानी को अपनी सहेली से मिलने जाना था, इसलिए आन्या अपनी नानी के घर की ओर चल पड़ी! जंगल के पास अचानक आन्या के सामने एक बड़ा सा कुत्ता आ गया और वह गुर्राने लगा!
'ओह कितने प्यारे कुत्ते हो तुम!' आन्या कुत्ते की तरफ देख प्यार से बोली!
'कुत्ता? कौन कुत्ता? मै एक भेडिया हूँ और मै अब तुमको खाने वाला हूँ!'
भेडिया गुर्रा कर बोला!
'भेडिया!' आन्या डर कर बोली!
उसकी सुंदर प्यारी आँखे डर से फैल गई!
भेडिया, आन्या की तरफ खाने को बढा पर उसकी सुंदर प्यारी बड़ी-बड़ी आँखे देख वह थोड़ा रूका!